Sawan Fasting Rituals : सावन की पहली सोमवार में कैसे करे शिव जी की

Sawan Fasting Rituals : सावन की पहली सोमवार में कैसे करे शिव जी की पूजा, जाने सम्पूर्ण जानकारी  

Sawan Fasting Rituals हमारे हिन्दू धर्म में सावन का महीना बहुत ही पवित्र माना जाता है, ये महीना भगवान शिव को समर्पित होता है| भगवान शिव का प्रिय महिना होता है, शास्त्रों और पुरानो के अनुसार समुद्र मंथन में जो जहर निकला था| उसे भगवान शिव ने पिया था, जिससे उनका शरीर गर्मी से तपने लगा| तभी सभी देवताओ ने मिलकर उनका अभिषेक किया| इसलिए इस माह में शिव आराधना करने से भोले नाथ की विशेष कृपा मिलती है|

18 जुलाई यानि आज सावन का पहला सोमवार है, सावन का महिना शिव जी के साथ-साथ माता पार्वती को भी समर्पित है, इस महीने में जो भी भक्त माता शिव जी और माता पार्वती की पूजा जो भी सच्चे मन से करते है| उन पर भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा होती है|

Sawan Fasting Rituals

2 लोटे जल से करे यह उपाय

ताम्बे की 2 लोटे में जल भरकर बिल्व पत्र रख ले और उत्तर दिशा की तरफ मुख करके अपने दोनों लोटो का जल अपने दोनों हाथो में ले-ले और दोनों लोटो का जल एक साथ ही शिवलिंग पर अर्पित करना है| और श्री शिवाय नामोस्तुभ्यम मंत्र का स्मरण करना है| धीरे जल अर्पित करने के साथ-साथ मंत्र का उचारण करते रहिये जब तक पूर्ण जल शिवलिंग पर समर्पित न हो| उसके बाद आपको बिल्व पत्र अर्पित करना है ध्यान रहे बिल्व पत्र की डंडी आपके ओर रहना चाहिए| बिल्व पत्र चढाते समय श्री शिवाय नामोस्तुभ्यम मंत्र का जाप जरुर करे बाबा भोलेनाथ की कृपा आप पर बनी रहेगी|

Sawan Fasting Rituals सावन में क्या-क्या करे

सावन में पुरे महीने सोमवार की व्रत रख सकते है, इस व्रत में व्रती को एक समय शाम के पूजा के बाद फलाहारी करना होता है| खाना शुभ-सात्विक आहार लेंगे बिना किसी प्याज और लहसुन का, इस व्रत में अन्न और नमक एक बार खाए| अगर आप चाहते की आप 1 साल तक सोमवार की व्रत कर लू या 16 सोमवार रखना चाहते है तो वो आप सावन के महीने से ही चालू करे| सभी भक्तो को पुरे महीने प्याज, लहसुन, नॉनवेज, शराब आदि का सेवन नहीं करना चाहिए| पुरे सावन के महीने शिव जी का अभिषेक करे| अभिषेक आप गंगाजल, पंचामृत से कर सकते है| पुरे सावन के महीने भगवान शिव को विल्व पत्र अर्पित करे|

Sawan Fasting Rituals मौन व्रत रखे

श्रावन माह में आप सोमवार की व्रत रखते है तो शिव जी की पूजा करे, कथा सुने, पुरे श्रावन मास का व्रत मौन व्रत धारण करके रखे| मौन व्रत 3 तरह का होता है, पुरे दिन का, या सूर्य उदय से लेकर सूर्य अस्त तक का यानि दिन का समय, सूर्य अस्त से लेकर अगले दिन सूर्य उदय तक का मतलब रात का, या भोजन करते हुए मौन रहने का व्रत करे| मौन व्रत करना भी अच्छा होता है| पुरे महीने शांति का वतावरण रखे किसी से लड़ाई झगड़ा न करे|

कैसा वस्त्र धारण करे Sawan Fasting Rituals

सावन के महीने में कभी भी नीला, कला, खाखी यानि नेवी ब्लू और भूरे रंग के कपड़ो को न पहने| आप पुरे सावन में श्वेत वस्त्र धारण कर सकते है ये भगवान शिव जी को यह बहुत प्रिय है|

कौन से मंत्रो का पाठ करे Sawan Fasting Rituals

सावन के महीनो में महामृत्युंजय मंत्र, शिवसहस्र नाम, रुद्राभिषेक, शिवमहिमा श्रोत, शिवतांडव श्रोत, या शिव चालीसा आदि का पाठ करे| रोज शिव मंदिर में दीप दान यानि संध्या के समय मंदिर में शिव और पार्वती माता को दीप प्रज्वलित करे| ये सावन में करना बहुत फलदायी होता है| सावन महीने हमें अपने किसी प्रिय वास्तु का त्याग करना चाहिए| सावन में साग या शाक नहीं खाना चाहिए इसका विशेष ध्यान रखे|

शिव जी को क्या-क्या अर्पित करे

सावन महीने में शिव जी को कुछ विशेष वस्तु अर्पित की जाती है, जिससे शिव जी प्रसन्न होते है और अपने भक्तो पर अपनी अपर कृपा बनाये रखते है| व्रती लोग को प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर कुछ विशेष वस्तु अर्पित की जाती है| जिसे शिव्मुट्ठी कहते है|

प्रथम सोमवार – कच्चे चावल एक मुट्ठी

दुसरे सोमवार – सफ़ेद तिल एक मुट्ठी

तीसरे सोमवार – खड़े मुंग एक मुट्ठी

चौथे सोमवार – जौ एक मुट्ठी

पाचवे सोमवार – सतुवा

आखरी सोमवार को 2 मुट्ठी भोग जरुर अर्पित करे, शास्त्रों और पुरानो में बताया गया है कि सावन सोमवार को व्रत रखने से सुहागिन औरतो को सुख समृधि मिलती है| जबकि आदमी इस व्रत को करते है तो व्यवसाय में उन्नति मिलाती है| काम धंधा में सफलता मिलती है, आर्थिक मजबूती मिलती है| और कुवारी लड्किया इस व्रत को करते है, तो उसे मन वांछित वर प्राप्त होता है|

क्यों करते है शिव जी आधी परिक्रमा

रोज शिव जी की परिक्रमा का नियम ले सकते है| शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती आधी परिक्रमा की जाती है, इस बात का ध्यान रखे| ऐसा तब हुवा जब शिव जी का एक परम भक्त था जो शिव जी की हमेशा पूजा करते और परिक्रमा करते थे| और माता पारवती को छोड़ देते थे तभी शिव जी ने अर्धनारीश्वर का रूपधारण कर लिया आधा शिव और आधा पार्वती का तभी से शिव जी की परिक्रमा हमेशा आधी ही होती और सभी भक्त को स्मरण रहना चाहिए की शिव जी की हमेशा आधी परिक्रमा होती है|  

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