NSA Act रास्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम Jahangirpuri violence

16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती के दिन दिल्ली के जहांगीरपूरी इलाके में हनुमान जयंती शोभा यात्रा में कुछ कट्टर पंथी मुसलमानों द्वारा तलवार और पत्थर बाजी करके विरोध किया गया | कट्टर पंथी मुस्लिमो द्वारा शुरु किये गए इस दंगे में अंसार, सलीम, इमाम शेख उर्फ़ सोनू, दिलशाद और अहीर ये पांच लोग शामिल थे | इस घटना को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह जी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर दीपेन्द्र पाठक जी को Law and Order Maintain करने को कहा | इस घटना पर कड़ी एक्शन लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर दीपेन्द्र पाठक ने अंसार, सलीम, इमाम शेख उर्फ़ सोनू, दिलशाद और अहीर इन पांच लोगो को  NSA Act के तहत गिरफ्तार किया |

NSA Act
NSA Act

NSA Act (रासुका )– Jahangirpuri Violence जहाँगीरपूरी हिंसा चर्चा में क्यों-

16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती के दिन दिल्ली के जहांगीरपूरी इलाके में हनुमान जयंती शोभा यात्रा में कुछ कट्टर पंथी मुसलमानों द्वारा तलवार और पत्थर बाजी करके विरोध किया गया | कट्टर पंथी मुस्लिमो द्वारा शुरु किये गए इस दंगे में अंसार, सलीम, इमाम शेख उर्फ़ सोनू, दिलशाद और अहीर ये पांच लोग शामिल थे | इस घटना को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह जी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर दीपेन्द्र पाठक जी को Law and Order Maintain करने को कहा | इस घटना पर कड़ी एक्शन लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर दीपेन्द्र पाठक ने अंसार, सलीम, इमाम शेख उर्फ़ सोनू, दिलशाद और अहीर इन पांच लोगो को  NSA Act के तहत गिरफ्तार किया |

NSA Act (रासुका) क्या है

राष्ट्रिय सुरक्षा अधिनियम (National Security Act) यह कानून सन 1980 इंद्रा गाँधी सरकार के द्वारा बनाया गया था |1980 में इलेक्शन जीतकर जब इंद्रा गाँधी फिर से प्राइम मिनिस्टर बनी थी तब उन्होंने ये कानून पास किया थे | तो NSA Act एक प्रकार से निवारक निरोध कानून है जिसे (Prevention detention Low) के लिए बनाया गया है |

यह कानून पुरे भारत में लागु होता हैं इसमें 18 सेक्शन है | इस कानून के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को पॉवर दी गयी है की वह किसी भी व्यक्ति को NSA Act के तहत हिरासत में लेने का अधिकार देता है यानि Preventively deten कर सकते है | NSA Act के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने ही हिरासत में रखा जा सकता हैं लेकिन मुजरिम के खिलाफ नयी सबूत मिलने पर सरकार इसकी समय सीमा बढ़ा सकती है | NSA Act के तहत किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को किसी से भी परामर्श करने या किसी से मिलने का कोई अधिकार नही होता |

क्यों विवादित हैं NSA Act (रासुका)

NSA एक प्रिवेंटिव कानून है मतलब इसमें किसी घटना होने से पहले ही सरकार किसी को भी अरेस्ट कर सकती हैं |

  • (1) cr.pc की धारा 50 के अनुसार हर व्यक्ति को गिरफ़्तारी का कारण जानने का पूरा अधिकार होता हैं | जबकि NSA के तहत संदिग्ध व्यक्ति को बिना कारण बताये 5 दिनों तक जेल में रख सकते हैं विशेष परिस्थिति या किसी कारण से यह अवधी 10 दिनों के लिए बढ़ा सकती है |
  • (2) सविंधान के अनुच्छेद-22(1) अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति को अपने वकील से परामर्श करने का पूरा अधिकार होता है जबकि NSA Act के तहत किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को किसी से भी परामर्श करने या किसी से मिलने का कोई अधिकार नही होता |
  • (3) cr.pc की धारा 56 एवं 76 अनुसार गिरफ्तार के 24 घंटे के अन्दर व्यक्ति को अदालत में पेश करना जरुरी होता हैं जबकि NSA Act के तहत किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को यह अधिकार नही होता है और ना ही यह अधिकार दिया जाता है | NSA Act के तहत कोई FIR दर्ज ना होने के कारण रास्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) में ऐसे मामलो को अपने डेटा में शामिल नही करता हैं |

जाने कौन और कैसे कर सकते हैं NSA Act (रासुका) का इस्तेमाल

भारतीय नागरिको पर  –

इस कानून का उपयोग राज्य के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, और राज्य सरकार कर सकती है | ये सभी NSA का इस्तेमाल अपने सिमित दायरे में कर सकते हैं | अगर सरकार को लगता है की वह व्यक्ति आवश्यक सेवा की आपूर्ति में बाधा बन रहा है तो उसे निश्चित रूप से गिरफ्तार करवा सकती हैं और अगर सरकार को लगता है की कोई व्यक्ति हमारे देश की प्रगति करने वाले कार्यो को रोक रहा है तो सरकार के पास उसे गिरफ्तार करने की पूरी शक्ति होती है | और अगर कोई भी व्यक्ति कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलने या व्यवस्थित करने में बाधा डालती हैं तो भी उसे निश्चित रूप से गिरफ्तार करवा सकते है | इस कानून के तहत जमाखोर लोगो को भी गिरफ्तार करवा सकते हैं |

विदेशियों नागरिको पर

अगर सरकार को ये लगे की कोई व्यक्ति अनावश्यक रूप से देश में रह रहा हो या देश में गैरकानूनों गतिविधियों में सम्मलित होने के बाद देश से भागने की फ़िराक में हो या कोई धांधली फैला रहा हो तो उसे गिरफ्तार करवा सकते है |

ROWLATT Act (रॉलेट एक्ट ) MISA (मिसा) Act

ऐसा नहीं हैं की भारत में पहली बार NSA जैसा  कानून बना था अंग्रेजो के समय से ऐसा कानून बनते आये हैं | 1818 के बंगाल रेगुलेशन-3 से यह माना जाता हैं की भारत में निवारक निरोध कानूनों(Prevention detention Law)  की शुरुवात हुयी थी |

  •  ROWLATT Act

रॉलेट एक्ट 1919 के तहत बिना किसी ट्रायल के संदिग्ध व्यक्ति को कारावास दिया जाता था |रॉलेट एक्ट 1919 के तहत भारतीयों को शक के आधार पर बिना किसी मुकदमा चलाये जेल में बंद रखने के अधिकार रॉलेट एक्ट के तहत आता है राज्द्रोहियो के सुनवाई के लिए एक अलग न्यायालय बनवाया गया था|अंग्रेजो के समय भारतीयों के पास मुक़दमे के फैसले के बाद किसी उच्च न्यालय में अपील करने का अधिकार नही होता था  और फिर भारतीयों ने इसका विरोध किया की रॉलेट एक्ट नहीं होनी चाहिए | गाँधी जी के नेत्रित्व में ROWLATT सत्याग्रह हुवा  और फिर विरोध के दौरान ही जलियावाला बाग़ कांड हुवा था |

स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1950 में निवारक निरोध अधिनियम(Preventive detention Act–PDA) बनाया गया जो दिसंबर 1969 तक लागु रहा | फिर बाद में वर्ष 1971 में सरकार ने आन्तरिक सुरक्षा अधिनियम के तहत (MISA) मिसा मेंटेनेंस ऑफ़ इंटरनल सिक्यूरिटी एक्ट लाइ जिसे 1977 में निरस्त कर दिया गया |

अभी तक NSA Act (रासुका) कब-कब और कहा लगा है

अप्रैल 2020 में covid-19 जब अपने चरम फेस पर था तब तब्लिकी जमात के लोग मस्जिद में छुपे हुए थे बाद में जब ये अपने बेवकूफी के कारण इन्फेक्टेड हुए और गाजियाबाद हॉस्पिटल में कोरेनटाइन के दौरान हॉस्पिटल के स्टाफ नर्शो और हेल्थ वर्करो से बदतमीजी के आरोप में 6 लोगो के उपर NSA Act लगा था |

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